ஸ்ரீ ஆதி சங்கரர் அருளிய
மகிஷாசுரமர்த்தினி ஸ்தோத்திரம்
Mahishasura Mardini Stotram

மகிஷாசுரனை அழித்த தேவி துர்க்கையைப் போற்றும் சம்ஸ்கிருத ஸ்தோத்திரம். ஸ்ரீ ஆதி சங்கரர் இயற்றியதாகக் கருதப்படும் இருபத்தொரு ஸ்லோகங்கள் கொண்ட பாடல், அயி கிரிநந்தினி என்றும் அழைக்கப்படுகிறது.

A Sanskrit hymn in praise of the goddess Durga's victory over the demon Mahishasura, traditionally attributed to Adi Shankaracharya. Twenty-one verses, also known as Ayi Giri Nandini.

21 ஸ்லோகங்கள்

Sooryagayathri

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अयि गिरि नन्दिनि नन्दित मेदिनि विश्व विनोदिनि नन्द नुते
गिरिवर विन्ध्य शिरोऽधिनि वासिनि विष्णु विलासिनि जिष्णु नुते
भगवति हे शिति कण्ठ कुटुम्बिनि भूरि कुटुम्बिनि भूरि कृते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
1
सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवन पोषिणि शङ्कर तोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते
दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
2
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय वासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते
मधु मधुरे मधु कैटभ गञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
3
अयि शत खण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुण्ड गजाधिपते
रिपुगज गण्ड विदारण चण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते
निज भुज दण्ड निपातित खण्ड विपातित मुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
4
अयि रण दुर्मद शत्रु वधोदित दुर्धर निर्जर शक्तिभृते
चतुर विचार धुरीण महा शिव दूतकृत प्रमथाधिपते
दुरित दुरीह दुराशय दुर्मति दानव दूत कृतान्त मते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
5
अयि शरणागत वैरि वधूवर वीर वराभय दायकरे
त्रिभुवन मस्तक शूल विरोधि शिरोऽधिकृत अमल शूलकरे
दुमिदुमित अमर दुन्दुभि नाद महो मुखरीकृत तिग्मकरे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
6
अयि निज हुङ्कृति मात्र निराकृत धूम्र विलोचन धूम्र शते
समर विशोषित शोणित बीज समुद्भव शोणित बीज लते
शिव शिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
7
धनु अनुषङ्ग रणक्षण सङ्ग परिस्फुरत् अङ्ग नटत् कटके
कनक पिशङ्ग पृषत्क निषङ्ग रसत् भट शृङ्ग हता बटुके
कृत चतुरङ्ग बलक्षिति रङ्ग घटत् बहुरङ्ग रटत् बटुके
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
8
सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमितध्वनिधीरमृदङ्गनिनादरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
9
जय जय जप्य जये जय शब्द परस्तुति तत्पर विश्वनुते
झण झण झिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुर सिञ्जित मोहित भूत पते
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटित नाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
10
अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते
श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी रजनी कर वक्त्र वृते
सुनयन विभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमर अधिपते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
11
सहित महाहव मल्ल मतल्लिक मल्लित रल्लक मल्लरते
विरचित वल्लिक पल्लिक मल्लिक झिल्लिक भिल्लिक वर्गवृते
सितकृत फुल्ल समुल्लसित अरुण तल्लज पल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
12
अविरल गण्ड गलन्मद मेदुर मत्त मतङ्गज राज पते
त्रिभुवन भूषण भूत कलानिधि रूप पयोनिधि राज सुते
अयि सुदतीजन लालस मानस मोहन मन्मथ राज सुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
13
कमल दल अमल कोमल कान्ति कलाकलित अमल भाललते
सकल विलास कलानिलय क्रम केलि चलत् हंस कुले
अलिकुल सङ्कुल कुवलय मण्डल मौलि मिलत् बकुलालि कुले
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
14
कर मुरली रव वीजित कूजित लज्जित कोकिल मञ्जुमते
मिलित पुलिन्द मनोहर गुञ्जित रञ्जित शैल निकुञ्जगते
निजगुण भूत महा शबरी गण सद्गुण सम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
15
कटितट पीत दुकूल विचित्र मयूख तिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणत सुरासुर मौलि मणि स्फुरत् अंशु लसन्नख चन्द्ररुचे
जित कनकाचल मौलि पदोर्जित निर्भर कुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
16
विजित सहस्र करैक सहस्र करैक सहस्र करैक नुते
कृत सुर तारक सङ्गर तारक सङ्गर तारक सूनु सुते
सुरथ समाधि समान समाधि समाधि समाधि सुजातरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
17
पद कमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमला निलये कमला निलयः स कथं न भवेत्
तव पदमेव परम्पदम् इत्यनु शीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
18
कनकलसत् कला सिन्धु जलैः अनुसिञ्चिनुते गुण रङ्गभुवम्
भजति स किं न शची कुच कुम्भ तटी परिरम्भ सुख अनुभवम्
तव चरणं शरणं करवाणि नत अमरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
19
तव विमलेन्दु कुलं वदनेन्दु मलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूत पुरीन्दु मुखी सुमुखी भिरसौ विमुखी क्रियते
मम तु मतं शिव नामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
20
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यम् उमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानु मितासि रते
यदुचितम् अत्र भवत्युररीकुरुता दुरुतापम् अपाकुरुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते
21

பலஸ்ருதி

स्तुतिमिमां स्तिमितः सुसमाधिना नियमतो यमतोऽनुदिनं पठेत्
परमया रमया स निषेव्यते परिजनोऽरिजनोऽपि च तं भजेत्
हरिः ॐ तत्सत् महिषासुरमर्दिनिस्तोत्रं हरिः ॐ तत्सत्

❤️ உடன் முருகனுக்காக

எல்லா உயிர்களும் இன்புற்று வாழ்க! முருகா!!

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